सुन्दर रूप,आकर्षित हुस्न से सत्ता को पाने की चाहत।।।

बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी, जेडीयू, भाजपा और कांग्रेस ने बिहार जीतने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव भी महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। अब ऐसे में एक और मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम सामने आया है,यह नाम है पुष्पम प्रिया चौधरी।  कल बिहार के बहुत अखबारों में छपे एक विज्ञापन ने सबको हैरान कर दिया है। विज्ञापन मे एक महिला ने खुद को बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बताया है। विज्ञापन के जरिए इस महिला ने यह दावा पेश किया है वह बिहार में होने वाले चुनाव में एक बहुत मजबूत उम्मीदवार है,वह मजबूत कैसे है यह तो सोचने का विषय है की कैसे कोई लन्दन में रहकर बिहार की सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रहा है,क्या इसके पीछे किसी बड़े राजनितिक पार्टी का हाँथ है

बिहार की जनता के नाम पत्र

पुष्पम प्रिया चौधरी ने विज्ञापन के माध्यम से बिहार की जनता को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह अगर वह बिहार की मुख्यमंत्री बन जाती हैं तो 2025 तक बिहार को देश का सबसे विकसित राज्य बना देंगी और 2030 तक इसका विकास यूरोपियन देशों जैसा होगा इसको पटल पर लाने के लिए उनके पास क्या सोच है यह तो वहीं जानें लेकिन सवाल उठना लाजमी है आखिर चुनाव के वक़्त ही पुष्पम प्रिया चौधरी को बिहार क्यों याद आ रहा है और फेसबुक के पेज प्रमोशन करके वह खुद को कैसे नेता साबित कर रहीं हैं.

जेडीयू के पूर्व एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं पुष्पम

पुष्पम प्रिया के पिता विनोद चौधरी जदयू के एमएलसी रह चुके हैं.जब उनसे मीडिया के लोगों ने उनकी राय जानने की कोशिस की तो उनका कहना था मेरी बेटी विदेश में पढ़ी-लिखी  है। वो बालिग है, उसकी और मेरी सोच में फर्क होना चाहिए। पीढ़ी का अंतर है। जो वो कर रही है सोच समझकर कर रही होगी, पिता होने के कारण मेरा आशीर्वाद उसके साथ है।

आरजेडी ने पुष्पम के दावे को किया खारिज
आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी का कहना है, ‘यह बचपना है और बचकाना बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है। जब वह लड़की सात-आठ साल की थी तभी से हम लोग उसे जानते हैं। उनके दादा समता पार्टी के नेता उमाकांत चौधरी एक वक्त हमारे साथ रह चुके हैं। उनके पिता विनोद चौधरी हैं जो प्रफेसर हैं और एमएलसी भी रह चुके हैं। उनके नामांकन में भी हम गए थे। हम ऐसी बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। मुख्यमंत्री बनना कोई मजाक है क्या? ऐसे ही कोई सीएम बन जाता है? यह मूर्खतापूर्ण प्रश्न है। समाज में चढ़ाने वाले लोग मिल जाते हैं। इतना संसाधन आया कहां से।’

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