बिहार चुनाव से पहले मांझी ने लिया यू टर्न बोले- RJD तानाशाही वाली पार्टी है


बिहार के महागठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है। विपक्षी दलों के इस गुट में विधानसभा चुनाव से पहले फूट के साफ संकेत मिल रहे हैं। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) और हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) के नेता एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं। HAM के मुखिया के बयान सुनकर लगता है कि वह फिर पलटी मार सकते हैं। मांझी ने मंगलवार को मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करके चर्चाओं को और हवा दे दी। वह इसे ‘शिष्‍टाचार भेंट’ बताकर निकल गए मगर RJD को नहीं बख्‍शा। मांझी ने कहा, “मैं उनसे (RJD नेताओं) से गुजारिश करूंगा कि वे तानाशाही ना करें। उन्‍होंने जिस व्‍यक्ति को अपने पार्टी का बिहार चीफ बनाया है, वह किसी और की नहीं सुनता। ऐसे नहीं चल सकता।”

नीतीश और मांझी की मुलाकात पर तेजस्‍वी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने बुधवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि ‘अगर महागठबंधन में कोआर्डिनेशन कमेटी नहीं होती तो जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष मांझी विधान परिषद के सदस्य कैसे बनते RJD के कोटे से।’ एनडीए के साथ रहने वाले मांझी मार्च, 2018 में महागठबंधन में शामिल हो गए थे. हम के संस्थापक मांझाी अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक हैं. आरजेडी की मदद से मांझी के बेटे संतोष कुमार मांझी को विधान परिषद में भेजा गया.

तेजस्वी यादव को इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया है, जो महागठबंधन के सहयोगी दलों को आरजेडी का ‘‘एकतरफा’’ कदम लग रहा है. तेजस्वी ने कहा, ‘‘हमने उन्हें तीन सीटें लोकसभा चुनाव में और एक सीट विधानसभा उपचुनाव में दी थीं. उन्हें याद रखना चाहिए कि एनडीए में उनके लिए क्या प्रस्ताव था.’’

ऐसे संकेत हैं कि यदि 31 मार्च तक हम प्रमुख की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह महागठबंधन में बने रहने को लेकर मंथन सकते हैं. इसको लेकर पूछे गए सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘‘हर कोई अपने रास्ते चुनने के लिए स्वतंत्र हैं.’’



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