तेजश्वी के शर्त पर ही चलेगी महागठबंधन।।।

महागठबंधन के छोटे दलों को इस बार राजद अधिक भाव देने के मूड में नहीं है,पिछले बार राजद ने जिस गलती को किया था इस बार वह इस गलती को करने के मूड में बिलकुल भी नहीं है। वह इस बार बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में अधिक सीट लेने के दांव के तौर पर ले रहा है। सोमवार को रालोसपा, हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी ने महागठबंधन के लिए को आर्डिनेशन कमिटी बनाने की मांग की थी। राजद ने दो टूक कह दिया-को आर्डिनेशन कमिटी नहीं होता तो मांझी के पुत्र को कैसे mlc बना दिया जाता।

सूत्रों के हवाले से ख़बर यह है की महागठबंधन के घटक दल की नजर विधानसभा की उन 101 सीटों का माना जा रहा है जो पिछले बार जदयू के खाते में थी। जदयू के निकलने के बाद नए घटक दलों-रालोसपा, हम और विकासशील इंसान पार्टी की नजर इन्हीं सीटों पर है। इसमें कांग्रेस की भी दिलचस्पी है। वह भी 41 से अधिक सीटों पर चुनाव लडऩा चाहती है। रणनीति यह है कि ये तीनों दल राजद पर दबाव बनाएं। कांग्रेस को पंचायती का मौका मिल जाए। इसी क्रम में कुछ अधिक सीटें कांग्रेस के पास भी आ जाए

इधर बात राजद की तो राजद कम से कम 150 सीटों पर लडऩे की तैयारी कर रहा है। उसकी झोली में रालोसपा के लिए 20 और हम तथा वीआइपी के लिए 10-10 सीटें हैं। बाकी सीटें कांग्रेस और वाम दलों के लिए है। वह उन सामाजिक समूहों को खुद से जोडऩे की मुहिम में है, जिनकी नुमाइंदगी का दावा उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी करते हैं।जगदानंद को प्रदेश अध्यक्ष, मनोज झा और एडी सिंह को राज्यसभा में भेजकर राजद ने स्वर्ण समाज को एक जुट करने में जुटा है जिसका वोट हमेशा से nda के झोले में जाता था.

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