क्या नितीश और तेजस्वी फिर साथ लड़ेंगे चुनाव

सत्ता में कब कौन किसके पाले में चला जाए ये आज तक एक ऐसी अनसुलझी पहेली है जिसको आज तक बड़े से बड़े राजनीतिज्ञ विषेशज्ञ भी नहीं समझ पाए हैं.अब बात बिहार की ही ले ली जाए तो कल बिहार में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर विधानसभा में प्रस्ताव पास होने के पीछे 20 मिनट की वो मुलाकात है जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच हुई.क्या यह मुलाक़ात आने वाले चुनाव में होने वाली बहुत बड़ी राजनितिक सुगबुगाहट की आहट तो नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने  प्रस्ताव पास करने का अनुरोध किया था. नीतीश कुमार भी एनआरसी से परेशान रहे हैं क्योंकि इससे उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि को धक्का लग रहा था और आने वाले चुनाव में विपक्ष इसको उठता जरूर और ये नितीश के लिए बहुत ही घातक साबित होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि एनआरसी का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है. इसलिए सदन से प्रस्ताव पास करने में कोई हर्ज नहीं है. अब आरजेडी इसको अपनी जीत बात रही है, जबकि बीजेपी हैरान है.

सदन के अंदर नितीश और तेजस्वी की जो जुगलबंदी देखने को मिली इसे बीजेपी यह सोचने पर जरूर मजबूर है क्या नितीश NDA से बाहर आने का कोई बहाना तलाश रहे हैं.

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