बिहार के विद्यार्थी राजस्थान के ‘कोटा’ पलायन नहीं करे इसके लिए बिहार सरकार ठोस कदम उठाएं- पवन राठौर

पटना, आज न्याय-मंच, बिहार के संस्थापक सदस्य सह मीडिया संयोजक पवन राठौर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ‘कोरोना’ महामारी से उत्पन्न संकट के दौरान बिहार के बच्चों को राजस्थान के ‘कोटा’ में जो परेशानी झेलनी पड़ी है वो अत्यंत ही पीड़ादायक रही। जबकि वहां के कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों ने बच्चों से पूरी फीस पहले ही ले लिया होता है फिर भी लॉकडॉउन में बिहारी बच्चे को खाने-पीने व रहने के लाले पड़ गए जिससे बच्चे काफी डरे-सहमे,असुरक्षित और काफी कष्ट महसूस करने लगे जिसका परिणाम यह हुआ कि बच्चे अवसाद के शिकार होने लगे तब बिहार सरकार को बच्चों को रेलगाड़ी से बिहार लाना पड़ा।

ये बताता है कि ‘कोटा’ के संस्थान और राजस्थान सरकार कितनी संवेदनहीन हो गयी थी जबकि बिहार से प्रतिवर्ष लगभग 50 हज़ार की संख्या में बच्चे वहां इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी के सिलसिले में ‘कोटा’ के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में नामांकन लेते हैं जिससे कोटा के संस्थानों को करोड़ों रुपये की आमदनी होती है और राजस्थान सरकार को भी राजस्व का लाभ मिलता है।बिहार के बच्चों के माध्यम से कोटा में अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बावजूद भी बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा जो वहां के संस्थानों और सरकार के लिए शर्म की बात है

मालूम हो कि पवन राठौर खुद एक ‘करियर कंसल्टेंट’ भी हैं जो इनसब घटनाओं को लेकर काफी व्यथित हैं।न्याय-मंच के संस्थापक सदस्य सह ‘करियर कंसल्टेंट’ पवन राठौर ने बताया कि मैं खुद विगत दस वर्षों से पटना में मेडिकल और इंजीनियरिंग के अभ्यर्थियों को अच्छे संस्थानों में नामांकन संबंधी निःशुल्क ‘करियर कॉउंसलिंग’ करते आ रहा हूँ जिससे अनुभव किया कि बिहार में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है बस सही दिशा में मार्गदर्शन करने की जरूरत है । इसके अलावे बिहार के अनुभवी और योग्य शिक्षकों को सुविधा व सम्मान मिले तो पटना के अलावे बिहार के कई जिले में ‘कोटा’ जैसा शिक्षा हब और माहौल बन जायेगा। साथ ही साथ कोचिंग संस्थानों को राज्य सरकार प्रोत्साहन देने का काम करे तो बिहार के बच्चे ‘कोटा’ पलायन नहीं करेंगे।


बकौल पवन राठौर ने प्रेस-विज्ञप्ति के माध्यम से बिहार सरकार से मांग की है कि बिहार के विद्यार्थी राजस्थान के ‘कोटा’ पलायन नहीं करें इसके लिए ठोस कदम उठाया जाय जिससे यहाँ के बच्चों को कम फीस देनी होगी जिसका लाभ अभिभावकों को होगा और बिहार का करोड़ों रुपये भी बिहार के संस्थानों, शिक्षकों और सरकार के राजस्व को मिलेगा क्योंकि ‘कोटा’ में पढ़ने वाले दो-तिहाई बच्चे व अस्सी फीसद फैकल्टी बिहार के ही होते हैं।

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