क्या नीतीश कुमार पर हमला करके बिहार की राजनीति में तीसरी धुरी बनना चाहते हैं प्रशांत किशोर?

third front in bihar

बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी हो रहा है उसे बिहार में सभी राजनितिक पार्टी में एक चिंता का विषय बन चूका है सब जानना चाहते हैं.चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर  की आगे की रणनीति आखिर क्या है (बात बिहार की) से वो अगले तीन महीने में एक करोड़ युवाओं को अपने साथ इस अभियान में शामिल कराने के लक्ष्य उन्होंने रखा है.जिस तरह प्रशांत किशोर बिहार की सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं उसे नीतीश कुमार समर्थकों को और न ही तेजस्वी यादव के चाहने वालों को रास आ रहा है. लेकिन एक बात साफ है कि बहुत दिनों के बाद कोई व्यक्ति मुद्दों के माध्यम से भविष्य की राजनीति करने का प्रयास कर रहा है.अन्यथा सभी राजनीतिक दल जातिगत आधार पर तो कुछ राष्ट्रवाद कुछ झूठे वादे से सत्ता की चाभी पाना चाहते है.

चुनावी रणनीतिकार किशोर का कहना है कि नीतीश कुमार के 15 साल के शासन काल में बिहार में दूसरे राज्यों की तुलना में हालात में बहुत सुधार नहीं हुए हैं. सारे मापदंडों पर बिहार 15 साल पहले भी सबसे पिछड़े राज्यों में से एक था. आज भी वहीं पर जमकर बैठा हुआ है. नीतीश कुमार ने अपनी अलग पहचान खो दी है. उनके अनुसार कभी महात्मा गांधी को मानने वाले नीतीश अब “गांधी विरोधी” भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़े हैं. कभी बिहार के सुप्रीम लीडर रहे नीतीश अब दूसरे की हामी भरने वाले रह गए हैं. प्रशांत किशोर मानते हैं कि बिहार में तरक्की हुई है, लेकिन उतनी नहीं जितनी राज्य की क्षमता है.

जिस तरह से प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में सक्रीय हो रहे है उसे यह बात जरूर सामने आ रही प्रशांत किशोर के दिमाग में कुछ बहुत बड़ा चल रहा है.सत्ता के गलियारों से यह ख़बर भी आ रही है बिहार जो आज तक एक अच्छे विकल्प की तलाश में था आज वो विकल्प उसे मिलने जा रहा है.

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